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डर पर कविता | डर क्यों रहा तु इंसान

V singh
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दोस्तों हर इंसान के जीवन में मुसीबते जिंदगी भर आती रहती  है,जो इंसान हिम्मतवाला होता हें वो चाहे कैसी भी मुसीबत हो उनसे नहीं डरता वो उनको हरा कर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन बहुत से लोग परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देते है, वो उन मुसीबतों से निपटने की बजाये  इतना ज्यादा डर जाते है की इनको कोई रास्ता ही नहीं दिखता  ये छोटी - छोटी मुसीबतों को बड़ी मुसीबत मान बैठते है, ओर अपने को सबसे दुःख आदमी डर उनके दीमाग में इस कदर बैठ जाता है, की वो क्या करें उन्हें कुछ समझ नहीं आता |
आज हम डर पर कविता - डर क्यों रहा तु इंसान लाये है, जिसके माध्यम से हम आपके अंदर के डर को निकालने का प्रयास करेंगे ओर आपको बतायेगे की डर के आगे जीत है, इस लिए डर से डरो नहीं बल्कि डट कर इसका सामना करो क्योंकि हर मुसीबत से निकलने का रास्ता होता है, बस उसे खोजने की जरूरत होती है |
डर पर कविता | डर क्यों रहा तु इंसान
डर पर कविता | डर क्यों रहा तु इंसान 


डर पर कविता | डर क्यों रहा तु इंसान 


मुसीबत सामने आये
तो तू क्यों डरता है
लड़ना है तुझे तो बस
हारने से क्यों डरता है|

जो डर गया वो मर गया
जो न डरा वो आगे बढ़ गया|

डर डर कर तूने अपनी
मुसीबतों को बड़ा कर दिया
हार को जीत में बदल यहाँ 
किसी ने इतिहास है रच दिया|

एवरेस्ट की ऊंचाई पर चढ़ने
हर साल हजारों लोग जाते
पर हजारों में से कुछ ही लोग
एवरेस्ट पर चढ़ पाते है|

वो वो लोग  होते है जो
मुसीबतों से नहीं डरते
मुसीबतों के सामने वो
डटकर खड़े रहते |
 
हार से वो कुछ न कुछ
सीखते रहते है 
फिर एक झटके में हार को
जीत में बदल दिया करते है |

फिर क्यों तु इतना डरता है
डर डर कर जीने से अच्छा तो
लड़ कर हारना अच्छा है|

हर मुसीबत का हल होता है
उससे डरना थोड़ी अच्छा है|

मुसीबतों से डरो नहीं - हिन्दी कविता 


डरो नहीं तुम आगे बढ़ो
मुसीबतों से तुम जमकर लड़ो
हर किसी के जीवन में
मुसीबतें आती रहती
आकर वो हमें डराती
लेकिन जो डरे नहीं 
वो हिम्मतवाला कहलाता
वो मुसीबतों से निपटने का
रास्ता खोज निकालता|

डर नहीं तु आगे बढ़
डर को डरा के आगे बढ़ 
आज हार गया तो कोई ना 
कल तु जीत जायेगा
जिस दिन अपने अंदर के
डर को तु मार भगाएगा
उस दिन मुसीबतों को हरा तु 
सफल इंसान कहलायेगा |

ऊंचाई से डर जाये पायलेट तो
प्लेन कौन उड़ाएगा
दुश्मन से डर जाये जवान तो
देश को कौन बचाएगा
बनो उस जवान की तरह
जो शपथ ऐसी लेता है
मुसीबत आये देश में कोई भी
वो थोड़ा भी नहीं डरता है
दुश्मनो के आगे वो
मौत बनकर खड़ा रहता
देश की रक्षा करने के लिए
वो रात दिन लड़ता रहता |

डर तुमने डराएगा - हिन्दी कविता 

डर से डरोगे तो
डर तुम्हे डराएगा
दिन हो या चाहे रात
अंदर ही अंदर तुम्हे खायेगा
न पानी पियोगे अच्छे से 
ओर न खाना  पाओगे
जब तक डर को अपने
अंदर से नहीं निकाल पाओगे
जीवन में दुःख हें तो सुख भी आयेगा
डर को निकालोगे अंदर से तभी तो 
जिंदगी जीने का मजा आयेगा |


छोटी सी ये जिंदगी
इसे प्यार से जियो तुम
सुख - दुःख के खेल को
अच्छे से जानो तुम
डरने से कुछ हासिल नहीं होगा
हासिल होगा तो बस दुःख ही होगा
इस लिए मुसीबतों से लड़ना सिख
जिंदगी को खुशी से जीना सिख |



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