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बारिश की बुदे:-एक छोटी सी कविता

V singh
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इस ब्लॉग पोस्ट में हम एक छोटे सी कविता बारिश की बुदे लेकर आये है, बारिश की बुदे कविता के माध्यम से  हमनें बहुत ही सरल भाषा में गाँव में कई दिनों बाद हों रही बारिश के बारे में बताया है, की किस तरह बारिश होते ही गाँव में चहल पहल देखने को मिलती है, तो चलिए कविता शुरू करते है.
एक छोटी सी कविता- बारिश की बुदे
Hindi kavita 

बारिश की बुदे:-एक छोटी सी कविता 


बारिश की बुदे गिरने लगी 
धूल जितनी  थी जमीन में
पानी के साथ बहने लगी

गर्म हवा बह रही थी जो  
अब ठण्डी हवा में बदल गयी

जो सुख गये थे नदी - तालाब  
पानी से वो भरने लगे

किसानों के मुरझाये चेहरे
खिले - खिले से लगने लगे

जंगल में लगी थी जो भीषण आग
वो देखते - देखते बूझ गयी

पशु - पक्षी थे जो भागे जगल से 
वो वापस जगलो की ओर जाने लगे

छोटे - छोटे बच्चे गाँव के नालों में 
कागज की नाव चलाने लगे

किसान चले सभी  खेतो में
धान की रोपाई  होंगी अब

गीत गाये जायेगे खेतो में
अलग ही रंगत होंगी अब

मछली पकड़ने मछुवारे
नदियों में निकलने लगेंगे

गाय बकरी चराने चरवाहे 
हरे मैदानो की ओर जाने लगेंगे

गाँव के सभी कुत्ते एक साथ
खेतो से वानर भगाएंगे

जगली जानवरों से फसल बचाने
किसान पहरा देने जायेगे

एक माँ बन किसान फसल की 
किट, पतंगों से फसल बचाएंगे

फिर एक दिन फसल होंगी तैयार 
किसान फसल को काटेगा 

देवी देवताओं का आशीर्वाद लेकर 
वो फसल बेचने जायेगे

अच्छे दामों में फसल बेच किसान 
अपने घर जो वापस आयेगा

अपने परिवार के साथ मेहनत से
कमाई रोटी खुशी से खायेगा

ओर अगली बारिश की बुदों का
इंतजार पुरे गाँव को रहेगा|

               - V singh


ओर कविता पढ़े -






आशा करते है आपको ये छोटी सी कविता बारिश की बुदे पसन्द आयी होंगी अगर पसंद आयी तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें ' धन्यवाद '














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