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यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक का हिन्दी अर्थ | Yada Yada Hi Dharmasya Sloka

V singh
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नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं इस ब्लॉग लेख पर जहां आज हम आपकों एक श्लोक यदा  यदा ही धर्मस्य .... का हिन्दी अर्थ विस्तार में बताने वालें हैं. जिसको हम बचपन से सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत गीता में पढ़ते आ रहें हैं. जिन भी लोगों ने गीता को पढ़ा होगा वो तो इस श्लोक का हिन्दी अनुवाद जानतें होगे.  जीन लोगों ने गीता नहीं पढ़ी लेकिन इस श्लोक को टेलीविजन के महाभारत सीरियर में सुना हैं. तो वो इस श्लोक का हिन्दी अर्थ नहीं जानते होगे।

जैसा की हर कोई जानता हैं, की गीता सनातन धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक हैं. क्योंकी इस में लिखें गए ज्यादातर श्लोक खुद भगवान कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध के समय सुनाए थे गीता इतनी पवित्र हैं की इसके पढ़ने मात्र से ही मनुष्य के अन्दर एक अलग ही ऊर्जा का प्रवाह होता हैं. जो मनुष्य को धर्म के रहा में चलने को प्रेरित करती हैं।

Yada Yada Hi Dharmasya Sloka Meaning In Hindi
Gita Sloka 
गीता में एक श्लोक आता हैं.यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत जो आप ने जरूर सुना होगा लेकिन उसका हिन्दी अर्थ बहुत सारे लोग को पता नहीं होगा की आखिर भगवान कृष्ण इस श्लोक के माध्यम से अर्जुन या इस दुनिया के प्रत्येक व्यक्ती को क्या कहना चाह रहें हैं. क्योंकि हर किसी को संस्कृत भाषा का ज्ञान नहीं होता जो इस श्लोक को समझ सकें तो चलिए जानतें हैं।

यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक का हिन्दी अर्थ | Yada Yada Hi Dharmasya Sloka In Hindi 

दोस्तों महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन ने अपने सगे संबंधियों , साथियों , गुरुजनों , पुत्रो को युद्ध के लिए तैयार देखा तो उनको सांसारिक मोह माया ने घेर लिया और वो युद्ध  करनें से मना करने लगें वो समझ नहीं सकें ही स्वयं भगवान उनकी तरफ से हैं. तो फिर किस बात की चिंता इसी लिए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार करनें के लिए गीता का ज्ञान दिया जिसे सुनने के बाद अर्जुन को समझ आ गया उसे क्या करना हैं।
उसी पवित्र गीता के अध्याय 4 का 7वा और 8वा श्लोक यह हैं चलिए हिन्दी अर्थ जानते हैं. साथ की इसकी विस्तार में पूरी व्याख्या भी करेंगे।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।

श्लोक का हिन्दी अर्थ 
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं. जब जब इस धरती में धर्म की हानि होती हैं, और अधर्म बढ़ता हैं. तब तब इस धरती पर ,मैं अवतार लेकर आता हूं।

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।

श्लोक का हिन्दी अर्थ
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं. सज्जनों और साधुओं की रक्षा करने के लिए और दुर्जनों और पापियों का विनाश कर इस धरती को पाप मुक्त करने के लिए मैं हर युग में बार - बार अवतार लेता हूं और धर्म की स्थापना कर समस्त धरती वासियों का कल्याण करता हूं।

यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक की विस्तार में व्याख्या ( Yada Yada Hi Dharmasya Sloka )

महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन ने अपने सामने अपनो को ही युद्ध करते देखा तो अर्जुन सांसारिक मोह माया में आ गए और उन्होंने युद्ध न करने का फैसला लिया लेकिन उस समय अधर्म इतना बढ़ गया था की उसे खत्म कर धर्म की स्थापना करने के लिए महाभारत का युद्ध जितना बहुत जरुरी था जो अर्जुन के बिना संभव नहीं था इस लिए भगवान कृष्ण ने अपनी शक्ति से समय को बांध कर अर्जुन को एक ऐसा ज्ञान दिया जिसे आज श्रीमद्भगवत गीता के नाम से जाना जाता हैं. जो सनातन धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथ में से एक हैं।

बात करें श्रीमद्भगवत गीता की तो इसमें 18 अध्याय हैं और जिसने कुल 700 श्लोक हैं. जिसमें से 574 श्लोक भगवान श्रीकृष्ण ने कहे वही 84 अर्जुन ने कहे और 41 संजय ने कहे तथा 1 धृतराष्ट्र ने कहा।

गीता के अध्याय 4 के 7 वे और 8 वे श्लोक में श्रीकृष्ण ने कहा था की जब जब इस धरती में अधर्म बढ़ने लगता हैं. लोग गलत काम कर पाप को बढ़ावा देने लगते हैं. जब धर्म का विनाश होने लगता हैं, तब में अधर्मियो का नाश कर धर्म की पुनः स्थापना करने इस धरती में अवतार लेता हूं।

श्रीकृष्ण कहते हैं जब सज्जन और साधुओं पर अन्याय होने लगता हैं, अधर्मी लोग जब सजन्नो पर अत्याचार करनें लगते हैं. तब में अवतार लेकर सजन्नों की दुष्टों से रक्षा करता हूं और इस धरती से अधर्मियों,  पापियों का विनाश करनें तथा धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए में हर युग में अवतार लेता हूं और सही धरती वासियों का कल्याण करता हूं।

भगवान श्रीकृष्ण के अवतार 

अभी तक भगवान विष्णु ने 23 अवतार लिए हैं,  लेकिन इनमें से  10 अवतार प्रमुख हैं. साथ ही जब कलयुग के अंत में पाप बहुत अधिक बढ़ जायेगा तब भगवान विष्णु के 24 वे अवतार यानि भगवान कल्कि इस धरती पर जन्म लेंगे जो पापियों का नाश करेंगे।
  • श्री सनकादि मुनि
  • वराह अवतार
  • नारद अवतार
  • नर - नारायण 
  • कपिल मुनि
  • दत्तात्रेय अवतार
  • यज्ञ
  • भगवान ऋषभदेव
  • आदिराज पृथु
  • मत्स्य अवतार
  • कूर्म अवतार
  • भगवान धन्वंतरि
  • मोहिनी अवतार
  • भगवान नरसिंह
  • वामन अवतार
  • हयग्रीव अवतार
  • श्रीहरि अवतार
  • परशुराम अवतार
  • महर्षि वेदव्यास
  • हंस अवतार
  • श्रीराम अवतार
  • श्रीकृष्ण अवतार
  • बुद्ध अवतार
  • कल्कि अवतार 
अन्य जानकारी 
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निष्कर्ष :-

आज के इस ब्लॉग खेल में हमनें हिंदुओ के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 4 के 7 वे और 8 वे श्लोक का हिन्दी अनुवाद आपकों बताया आशा करते हैं आपको यह जानकारी यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक का हिन्दी अर्थ  ( Yada Yada Hi Dharmasya Sloka in Hindi)  जरूर पसंद आई होगी और आपकों इससे बहुत कुछ सीखने को भी मिला होगा धन्यवाद आपका दिन शुभ हों 🙏 जय श्रीकृष्णा 🙏

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