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ईश्वर की खोज कविता - Ishwar Ki Khoj

V singh
By -

Ishwar Ki Khoj Kavita In Hindi :- नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं, इस ब्लॉग लेख में जहां आज हम आपके लिए एक सुंदर सी कविता जिसका नाम ईश्वर की खोज हैं, लेकर आए हैं , जो आपकों जरूर पसंद आयेगी।

दोस्तों हम इस कविता के माध्यम से यह नहीं बता रहें की ईश्वर की खोज कैसे करें बल्कि हम इस कलयुग का कुछ सच आपके सामने रख रहें है. जैसा की कहा जाता हैं की सच्चे मन से भक्ति करों तो ईश्वर दर्शन देते हैं. यह सही भी हैं, पर क्या इस कलयुग में कोई इंसान होगा जिसका मन सच्चा होगा जिसने कभी कोई पाप नहीं किया होगा, हमें नहीं लगता कोई ऐसा हो क्योंकि आज तो बहुत सारे लोग साधु संत का रूप धारण कर भी खुद को ईश्वर भक्त बता लोगों को लूट रहें हैं, बेवकूफ बना रहें हैं. जबकि खुद उनके अन्दर लोभ लालच भरा पड़ा हैं।

Ishwar Ki Khoj Poem In Hindi
Hindi Poem 

हमारे बस की बात नही की हम ईश्वर की खोज कर सके उसे देख सकें क्योंकी न हमारा मन साफ, न हमनें उसे पुकार भक्ती की लय में फिर वो होगा भी हमारे सामने तो कैसे पहचानेंगे।

ईश्वर की खोज कविता - बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा 

मन में तेरे लोभ लालच भरा
तू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा
ईश्वर तो हर जगह पर मौजूद
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

घर की औरतों की तू इज्जत करें
दूसरी औरतो पर बुरी नजर रखें
तू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा
खुद ईश्वर तेरे सामने होगे 
पर तू इन गंदी नजरों से
उनको नहीं देख पायेगा
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

बेजुबानों का दर्द न दिखें तुझे
तू सरे आम उन पर जुल्म करें
तू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा
इतने अत्याचार बेजुबानों पर कर
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

भूखे को तू न खाना खिलाएं
न प्यासे को तू पानी पिलाएं
तू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा
एक दुसरे से जल जल कर
तू क्या अंत में पायेगा
 तू क्या अंत में पायेगा 
बिना अच्छे कर्म किए 
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

जीवन में किए बुरे कर्मो को
भक्ति की चादर से छुपाएगा
तू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा
क्या मरने के बाद भी तू 
स्वर्ग की चाह लगाएगा
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

माता पिता को पहुंचा वृद्धाश्रम
कैसे सुख , समृद्धि पायेगा
यू क्या ईश्वर भक्त बन पाएगा 
जीवन भर लगाले चार धाम के चक्कर
पर सुख कभी तू न पायेगा
बता तू कैसे ईश्वर को पायेगा।

हिन्दी कविता - ईश्वर कहा 

हर कण - कण में ईश्वर हैं
ढूंढ सको तो ढूंढ लो
ना मिले तो यह मत कहना
ईश्वर कहा है।
यह पूरी सृष्टि उसी के अन्दर
तुम खुद ईश्वर के अन्दर समाए
देख सको तो देख लो
ना दिखे तो यह मत कहना
ईश्वर कहा है।
तुम्हारा जन्म से लेकर मृत्यु का
सब लेखा जोखा उसके पास हैं
समझ सको तो समझ लो
ना समझ सकें तो फिर ना कहना
ईश्वर कहा है।
उसको देखने के लिए न धन दौलत चाहिए
न मंदिर न मस्जिद न गिरजाघर चाहिए
बस चाहिए मन में शांति और साफ मन चाहिए
उसके होने का अहसास कर सको तो कर लो
ना कर सको तो फिर मत कहना
ईश्वर कहा है।

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